योगी खेल जगत के खेल | मन में रह अलमस्त जगत के सारे सुख दुःख झेल | योगी खेल जगत के खेल | इस नाटक की कथावस्तु हो सुखांत या दुखांत | कलाकार तू कला दिखादे फल में हो न अशांत | क्षण भर ही हँसना रोना क्षण भर ठेलम ठेल | योगी खेल जगत के खेल | झूठ समझ सब रोना गाना धन वैभव अधिकार | सूत्रधार की है सब माया नाटकमय संसार | जीवन का अभिनय होने दे रस रंगों का मेल | योगी खेल जगत के खेल |